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Thursday, 6 December 2018


प्रतीक्षा 

सपनों में जीते हे हम,
सपनों से सोते-जागते हे हम
 मगर बीच-बीच में न गिर जाना,
सपनों की वो तस्वीरों से नज़र. 

ऊँची सपनों को मिलाने की,
कोशिश में रहो, हर पल,
न थक जाना हे दिल,
न कभी मुड़ना हे हम,
अपनी प्रतीक्षा से!

हर पल जीते रहो,
जी भरकर काम करते रहो!
एक दिन सफल हो जाएंगे हम!
आगे चल, इस प्रतीक्षा से!
बिना किसी उम्मीद से,
न जीना इस दुनिया में.
सुलझाओ  अपनी दिलचस्पी को,
 हासिल करो अपनी लक्ष्य को,
आगे चल, अपनी प्रतीक्षा से!

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